Saturday, November 29, 2008

"हम कितने बदल गए" .. यह श्रधांजलि है उन जवानों को जो शहीद हुए हमारे खातिर, हमारी मुंबई , अपने देश के खातिर..उन्हें शत शत नमन ..!!!

"हम कितने बदल गए"

बैठ एकाकी घर से दूर सोच रहा था,
मूक दर्शक बन सब देख सुन रहा था,
होगा कब ख़तम ये आतंक का खेल,
मन ही मन इस प्रश्न का उत्तर दूंढ रहा था ,

की आया दोस्तों का संदेशा,
हो सुरक्षित ना , रहो घर मे ही
बाहर है बड़ी अनहोनी की आशंका,
फिर माँ पापा का आया सन्देश,
बेटा घर आ जाओ ,यहीं जी लेंगे
रुखी सुखी जो मिले खा लेंगे,

सारे सन्देश मुझे अन्दर से हिला गए
एक बारगी सोचा हम कितने बदल गए !!

नेता लोग शर्म और मर्यादा की सीमा लांघ गए ,
वो कपडे बदल बदल फैशन करते रहे,
और हमे लिपिस्टिक पाउडर का पाठ पढ़ा गए,
हद तो तब हो गयी जब उनमे से एक ने,
शहीद के घर को भी नहीं छोड़ा,
वो भोंकते रहे अपनी जात दिखाते रहे
और हम बस चुप चाप बैठे रहे ,
सच मुच हम कितने बदल गए ,हम कितने बदल गए !!

सोचा की अब आ गया है समय की करूं आत्म विश्लेषण
जो हुए शहीद ,क्यूं हुए वो, क्यों की न्योछावर
अपनी जान, लिये हमारी सुख चैन के,
जी सकते थे वो भी तो अपनी घरों मे बैठ के,

यही वो देश है जहाँ माँओं ने जना लाल ,
भगत चन्द्रशेखर सा ,दोस्त मिले राजगुरु और बिस्मल सा,
माँ ने भेजा शिवाजी को कर तैयार करने दो दो हाथ,
देश पर मर मिटने आयी थी रानी अपने दुधमुहे बेटे के साथ,
फिर हुई खुशी ये देख कर की आज भी जने है माँओं ने
हेमंत, विजय,अशोक ,गजेन्द्र और संदीप से लाल,

वो सब आज बाज़ी मार गए,
परिवार दोस्त और माँ से ऊपर भारत माँ है बतला गए,
और हम भीड़ बन तमाशा देखते रह गए,
कभी न सोचा कि कर गुजरूँ ऐसा ,
जो देश हित मे वो सब कर गए..
सचमुच हम कितने बदल गए.. हम कितने बदल गए!!